झारखंड: झारखंड हाईकोर्ट ने जीशान शेख उर्फ रिकी की नजरबंदी (Preventive Detention) को सही ठहराया है। हाईकोर्ट की खंडपीठ ने उसकी रिहाई की मांग वाली याचिका खारिज कर दी। खंडपीठ ने माना कि नजरबंदी आदेश कानून के अनुरूप और उचित है।
सरकार द्वारा बार-बार अवधि बढ़ाना भी वैध है। इसमें किसी प्रकार की कानूनी त्रुटि नहीं है। ऐसे में सभी नजरबंदी आदेश और उनके विस्तार बरकरार (Uphold) रखे गए। कोर्ट ने कहा कि इस मामले में हस्तक्षेप की जरूरत नहीं है और नजरबंदी जारी रहेगी।
उल्लेखनीय है कि रांची जिला मजिस्ट्रेट ने 25 जून 2025 को झारखंड क्राइम कंट्रोल एक्ट की धारा 12(2) के तहत जीशान शेख को निवारक नजरबंदी में लिया था। राज्य सरकार ने इसे कई बार बढ़ाया, जो मार्च 2026 तक था।
हाईकोर्ट ने क्या कहा?
हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद एवं न्यायमूर्ति संजय प्रसाद की खंडपीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता जीशान के खिलाफ हत्या के प्रयास, रंगदारी, संगठित अपराध और आर्म्स एक्ट के कई मामले दर्ज हैं।
2023 और 2024 में लगातार आपराधिक गतिविधियों में संलिप्तता पाई गई है। रांची जिला दंडाधिकारी ने सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए नजरबंदी का आदेश दिया। पुराने मामलों और नजरबंदी के बीच “सजीव और निकट संबंध (live & proximate link)” मौजूद हैं।
जानें क्या था मामला?
याचिकाकर्ता जीशान शेख ने अपनी नजरबंदी को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। उसने अपनी याचिका में कहा था कि जिला प्रशासन द्वारा 25 जून 2025 को जारी नजरबंदी आदेश अवैध है। बाद में, 4 जुलाई, 8 अगस्त, 23 सितंबर और 12 दिसंबर 2025 को बढ़ाई गई अवधि भी बिना नए आधार के “मैकेनिकल तरीके” से की गई इसलिए उनकी रिहाई का आदेश दिया जाए। जीशान शेख बिरसा मुंडा सेंट्रल जेल, होटवार में बंद है।

































