बंगाल: मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को लेकर बड़ी खबर आयी है। टीएमसी की अगुवाई में विपक्ष ने CEC को उनके पद से हटाने के प्रस्ताव से जुड़ा नोटिस संसद के दोनों सदनों में जमा कराया है।
पश्चिम बंगाल मे जारी SIR के लेकर ममता बनर्जी ज्ञानेश कुमार से काफी नाराज है। SIR को लेकर ममता और चुनाव आयोग के बीच कई बार वार-पलटवार हो चुका है।
मामला सुप्रीम कोर्ट तक जा चुका है। यहां तक कि ममता आयोग के खिलाफ धरने पर बैठ गयी है। अब बात महाभियोग प्रस्ताव लाने तक पहुंच गया है।
जानकारी के अनुसार संसद में दिये गये 10 पन्नों वाले नोटिस में सात बिंदु दर्ज किये हैं, जिनके आधार पर ज्ञानेश कुमार को हटाने का प्रस्ताव रखा गया है। लोकसभा में दिये गये नोटिस में 130 सांसदों के और राज्यसभा में दिये गये नोटिस में 63 सांसदों के हस्ताक्षर हैं।
नोटिस में ज्यादातर विपक्षी पार्टियों के सांसदों ने हस्ताक्षर किये हैं। लेकिन, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और राज्यसभा में विपक्ष के मल्लिकार्जुन खरगे हस्ताक्षर करने वालों में शामिल नहीं हैं।
संविधान के अनुच्छेद 324 (5) में मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने का प्रावधान किया गया है। इस अनुच्छेद के अनुसार CEC को पद से हटाने की वही प्रक्रिया होगी, जो सुप्रीम कोर्ट के किसी जज को हटाने की होती है।
सुप्रीम कोर्ट के किसी जज को उसके पद से हटाने का प्रावधान संविधान के अनुच्छेद 124 (4) में किया गया है। इसके अनुसार, जज को दुर्व्यवहार और कार्य निष्पादन में अक्षमता यानी दो आधार पर ही हटाया जा सकता है।
124 (5) के अनुसार, संसद के दोनों सदनों में विशेष बहुमत के द्वारा प्रस्ताव पारित कर राष्ट्रपति को किसी जज को हटाने की सिफारिश की जा सकती है।
सुप्रीम कोर्ट के किसी जज को हटाने की पूरी प्रक्रिया जजेज इंक्वायरी एक्ट 1968 (Judges Inquiry Act) में दी दर्शायी गयी है।
इसके अनुसार, हटाने का नोटिस किसी एक सदन में या दोनों सदनों में एक साथ दिया जा सकता है। ज्ञानेश कुमार को हटाने का नोटिस इसी आधार पर दिया गया है।

































