झारखंड विधानसभा में स्वास्थ्य व्यवस्था पर जयराम महतो का हमला

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झारखंड: झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के दौरान, डुमरी विधायक जयराम महतो ने स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा, परिवार कल्याण और खाद्य सार्वजनिक वितरण विभागों के अनुदान मांगों पर चर्चा के दौरान, राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि झारखंड में स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति अभी भी चिंताजनक है और इसे सुधारने के लिए ठोस कदम उठाने की जरूरत है।

सदन में बोलते हुए जयराम महतो ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 और अनुच्छेद 47 का हवाला देते हुए राज्य में एनुअल हेल्थ चेकअप एक्ट लागू करने की मांग की। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य जांच आज इतनी महंगी हो गई है कि मध्यम और गरीब वर्ग के लोग नियमित जांच नहीं करा पाते. कई युवाओं को बीमारी का पता तब चलता है। जब, हालत गंभीर हो जाती है। समय पर जांच की व्यवस्था होने से कई लोगों की जान बचाई जा सकती है।

विधायक ने राज्य में डॉक्टरों और नर्सों की भारी कमी का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि विश्व स्वास्थ्य संगठन के मानकों के अनुसार, एक हजार लोगों पर एक डॉक्टर होना चाहिए। लेकिन, झारखंड में लगभग 3500 लोगों पर एक डॉक्टर उपलब्ध है।

विशेषज्ञ डॉक्टरों की स्थिति और भी खराब है। उन्होंने बताया कि राज्य में नर्सों के 5872 स्वीकृत पद हैं, जिनमें से करीब 3333 पद अभी भी खाली हैं। इसके अलावा, आबादी के हिसाब से 6500 उप स्वास्थ्य केंद्र होने चाहिए। लेकिन, करीब 3900 ही संचालित हो रहे हैं।

जयराम महतो ने कहा कि राज्य का स्वास्थ्य बजट करीब 8000 करोड़ रुपये है। जबकि, निजी स्वास्थ्य सेवाओं का बाजार लगभग 12000 करोड़ रुपये का हो चुका है। उन्होंने कहा कि सरकारी अस्पतालों की व्यवस्था मजबूत नहीं होने के कारण आम लोगों को निजी अस्पतालों में महंगा इलाज कराने को मजबूर होना पड़ता है। कई परिवारों को इलाज के लिए अपनी जमीन और गहने तक बेचने पड़ते हैं।

झारखंड में सड़कों पर बढ़ती दुर्घटनाओं और उसमें होने वाली मौतों पर भी चिंता जताई।

उन्होंने कहा कि देश में जहां 100 सड़क दुर्घटनाओं में औसतन 33 लोगों की मौत होती है। वहीं, झारखंड में यह आंकड़ा करीब 72 तक पहुंच जाता है। पिछले पांच वर्षों में, राज्य में लगभग 19 हजार युवाओं की सड़क दुर्घटनाओं में जान गई है। इसके पीछे, एम्बुलेंस की कमी और समय पर इलाज नहीं मिलना भी एक बड़ा कारण है।

विधायक ने झारखंड में एक मेडिकल यूनिवर्सिटी की स्थापना की मांग करते हुए कहा कि इससे चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत किया जा सकेगा। उन्होंने रिम्स-2 से जुड़े जमीन विवाद को सुलझाने और हर प्रमंडल में रिम्स जैसी संस्था स्थापित करने का भी सुझाव दिया। इसके अलावा, लैब विशेषज्ञों की बहाली के नियमों में बदलाव करने और राज्य के युवाओं को अधिक अवसर देने की बात कही।

जयराम महतो ने राज्यकर्मी स्वास्थ्य बीमा योजना को भी प्रभावी नहीं बताया। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों को पांच लाख रुपये तक का कैशलेस इलाज नहीं मिल पा रहा है, जिससे उन पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है। इसके साथ ही उन्होंने किसानों को धान का समर्थन मूल्य 3200 रुपये प्रति क्विंटल देने की मांग दोहराई और आंदोलनरत आंगनबाड़ी सेविका, सहायिका और सहिया बहनों की समस्याओं का समाधान करने की अपील की। अंत में, उन्होंने कहा कि राज्य सरकार को केंद्र के भरोसे रहने के बजाय अपने संसाधनों के आधार पर स्वास्थ्य और शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करना चाहिए।

 

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