नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने झारखंड सरकार के मंत्री हफीजुल हसन पर निशाना साधा है। बाबूलाल ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि हफीजुल हसन के लिए संविधान नहीं, शरीयत मायने रखता है और वह केवल अपने समुदाय के प्रति वफादार हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव के समय हफीजुल गरीब, दलित और आदिवासियों के सामने हाथ जोड़कर वोट मांगते हैं, लेकिन अब अपना इस्लामिक एजेंडा चलाने की कोशिश कर रहे हैं।
*बाबूलाल मरांडी का आरोप*
– हफीजुल हसन की कट्टर सोच संथाल परगना की सांस्कृतिक पहचान और आदिवासी अस्मिता के लिए खतरा है।
– संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति को कट्टरपंथी विचारधारा को बढ़ावा नहीं देना चाहिए।
– शरीयत भारतीय संविधान की मूल भावना के विपरीत है।

*निशिकांत दूबे का बयान*
गोड्डा सांसद निशिकांत दूबे ने भी हफीजुल हसन और कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस और उनके सहयोगियों के लिए बाबासाहेब अंबेडकर के संविधान का कोई मूल्य नहीं है। हफीजुल हसन के अनुसार, मुस्लिम संविधान यानी सरिया कानून पहले आता है, फिर कोई अन्य संविधान। निशिकांत दूबे ने कहा कि मीडिया इस मुद्दे पर चुप रहेगा क्योंकि यह INDIA गठबंधन का हिस्सा है।
*आगे की कार्रवाई*
बाबूलाल मरांडी ने मांग की है कि यदि राहुल गांधी और हेमंत सोरेन संविधान के प्रति सच्ची आस्था रखते हैं, तो उन्हें तुरंत हफीजुल हसन को मंत्रिमंडल से बर्खास्त करना चाहिए ।































