जम्मू-कश्मीर में 26 पर्यटकों की हत्या के बाद केंद्र की मोदी सरकार ने सिंधु नदी का पानी रोकने की घोषणा की है। सरकार का दावा है कि इससे पाकिस्तान को पानी की कमी का सामना करना पड़ेगा। लेकिन क्या यह दावा सच है? क्या सिंधु नदी का पानी रोकना संभव है?
सिंधु नदी का पानी रोकने की बात पहली बार नहीं हो रही है। इससे पहले वर्ष 2016 में उरी हमले के बाद और वर्ष 2019 में पुलवामा हमले के बाद भी ऐसी ही बातें की गई थीं। लेकिन क्या सरकार ने वास्तव में पानी रोकने के लिए कोई ठोस कदम उठाए हैं?
वास्तविकता यह है कि सिंधु नदी का पानी रोकना आसान नहीं है। इस नदी में प्रति वर्ष 133 बिलियन एकड़ फुट पानी बहता है, जिसे रोकने के लिए बड़े-बड़े बांध बनाने पड़ेंगे। इसके लिए सालों का वक्त लगेगा और खरबों रुपये खर्च करने पड़ेंगे।
इसके अलावा, सिंधु नदी का पानी रोकने से नदी के रास्ते आने वाले भारतीय इलाकों पर भी बाढ़ की तबाही का खतरा बढ़ जाएगा। इसलिए, यह सवाल उठता है कि क्या सरकार का दावा सिर्फ लोगों को बुरबक बनाने के लिए है?
*क्या है सिंधु जल संधि?*
सिंधु जल संधि 1960 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुई थी। इस संधि के तहत, भारत को रावी, ब्यास और सतलुज नदियों का पानी उपयोग करने की अनुमति है, जबकि पाकिस्तान को सिंधु, झेलम और चिनाब नदियों का पानी उपयोग करने की अनुमति है।
अब देखना यह है कि सरकार का सिंधु नदी का पानी रोकने का दावा कितना सच है और क्या यह वास्तव में संभव है।


























