मई 2025 में जीएसटी कलेक्शन 2.01 लाख करोड़ रुपये रहा, जो मई 2024 के मुकाबले 16.7% ज्यादा है। लेकिन हैरानी की बात ये है कि बाजार सुस्त पड़ा है और लोगों की जेबें खाली हो रही हैं। इसका जवाब है — महंगाई। चीजों के दाम बढ़ गए हैं और लोग मजबूरी में ज़्यादा खर्च कर रहे हैं।
*महंगाई की मार*
सरकार इस महंगाई को काबू करने में नाकाम रही है। आरबीआई के आंकड़े बताते हैं कि कंपनियां भी कर्ज कम ले रही हैं, क्योंकि बाजार में डिमांड नहीं है। जब उत्पादन घटा है और आमदनी नहीं बढ़ी, तो फिर टैक्स कलेक्शन कैसे बढ़ा? जवाब साफ है — जनता की जेब से ज्यादा पैसा खींचा जा रहा है।
*सरकार की उपलब्धि?*
सरकार इसे उपलब्धि बताने से नहीं चूक रही है, लेकिन आम आदमी की हालत दिन-ब-दिन खराब होती जा रही है। दुकानों में जाकर देखिए, या तो कीमतें 15-20% बढ़ी हैं या फिर वजन घटाकर कीमतें वही रखी गई हैं। ऐसे में सरकार को ज्यादा जीएसटी मिल रहा है, लेकिन आम आदमी की जेबें खाली हो रही हैं।

























