अमेरिका की स्पेस एजेंसी नासा और भारत की स्पेस एजेंसी इसरो ने एक संयुक्त मिशन ‘निसार’ पर काम शुरू किया है, जिसका उद्देश्य पृथ्वी की बदलती स्थिति का विस्तृत अध्ययन करना है। यह मिशन पृथ्वी की सतह पर हो रहे भौगोलिक बदलावों को लगातार रिकॉर्ड करेगा और वैज्ञानिकों को महत्वपूर्ण डेटा प्रदान करेगा।
*निसार मिशन के उद्देश्य*
निसार मिशन के मुख्य उद्देश्य हैं:
– *पृथ्वी की सतह का मानचित्रण*: निसार उपग्रह पूरी पृथ्वी का मानचित्र तैयार करेगा और इसमें हो रहे बदलावों को हर 12 दिन में दो बार रिकॉर्ड करेगा।
– *भौगोलिक बदलावों का अध्ययन*: यह मिशन धरती की सतह पर जमी बर्फ, ज़मीनी हिस्से, इकोसिस्टम में बदलाव, समंदर के जलस्तर में बदलाव और भूजल स्तर से जुड़े आंकड़े जमा करेगा।
– *प्राकृतिक खतरों का अध्ययन*: निसार मिशन भूकंप, सूनामी, ज्वालामुखी और भूस्खलन जैसे प्राकृतिक खतरों को समझने में मदद करेगा।
*नासा और इसरो की भूमिका*
नासा और इसरो दोनों एजेंसियों की इस मिशन में महत्वपूर्ण भूमिका होगी:
– *नासा*: नासा एल-बैंड एसएआर प्रणाली प्रदान करेगी, जिसमें उच्च-रेट विज्ञान डाउनलिंक प्रणाली, जीपीएस अभिग्राही और एक ठोस स्टेट रिकॉर्डर शामिल हैं।
– *इसरो*: इसरो एस-बैंड एसएआर प्रणाली प्रदान करेगी, जिसमें अंतरिक्ष यान बस प्रणाली, जीएसएलवी प्रमोचन प्रणाली और मिशन प्रचालन संबंधी सेवाएं शामिल हैं।
निसार मिशन पृथ्वी की बदलती स्थिति का अध्ययन करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। यह मिशन वैज्ञानिकों को महत्वपूर्ण डेटा प्रदान करेगा और प्राकृतिक खतरों को समझने में मदद करेगा। नासा और इसरो की संयुक्त प्रयास से यह मिशन सफल होगा और पृथ्वी के बारे में हमारी समझ को बढ़ाएगा।

























