अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से भारत पर अगले महीने लगाए जाने वाले रेसिप्रोकल टैरिफ़ का नुकसान अब अमेरिकियों को भी भुगतना पड़ सकता है।
भारत पर लगने वाले इस टैरिफ़ के कारण लाखों अमेरिकियों पर मेडिकल बिलों का बोझ बढ़ सकता है।
भारत के वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने व्यापार समझौते की उम्मीद में अधिकारियों से चर्चा के लिए पिछले सप्ताह अमेरिका की यात्रा की थी, जिसमें गोयल भारत के महत्वपूर्ण निर्यात उद्योगों जैसे औषधीय दवाओं पर टैक्स वृद्धि को रोकना चाहते हैं।
टैरिफ़ विदेशी आयातों पर लगने वाला सरकारी कर (टैक्स) है।
डोनाल्ड ट्रंप ने फ़ार्मा कंपनियों पर बड़ी टैरिफ़ लगाने की बात कही है, जिसका भारत पर काफी असर पड़ सकता है। अमेरिका अपनी अधिकतर दवाइयां चीन, भारत और यूरोप से ख़रीदता है, इसलिए फ़ार्मा इंडस्ट्री पर टैरिफ़ लगने से भारतीय फ़ार्मा कंपनियों को निर्यात पर असर पड़ सकता है ।
*भारतीय फ़ार्मा उद्योग पर टैरिफ का पड़ सकता है गहरा असर*
– *निर्यात पर असर*: टैरिफ़ लगने से भारतीय फ़ार्मा कंपनियों को अमेरिका में अपनी दवाइयां बेचने में मुश्किल हो सकती है, जिससे उनके निर्यात पर असर पड़ सकता है।
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– *राजस्व पर असर*: टैरिफ़ से भारतीय फ़ार्मा कंपनियों के राजस्व पर भी असर पड़ सकता है, क्योंकि उन्हें अपनी दवाइयों की कीमतें बढ़ानी पड़ सकती हैं या अपने मार्जिन में कटौती करनी पड़ सकती है।
– *रोजगार पर असर*: टैरिफ़ का असर भारतीय फ़ार्मा उद्योग में रोजगार पर भी पड़ सकता है, क्योंकि कंपनियों को अपने कर्मचारियों की संख्या में कटौती करनी पड़ सकती है या अपने व्यवसाय को सीमित करना पड़ सकता है।
हालांकि, यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि टैरिफ़ का असर भारतीय फार्मा उद्योग पर कितना पड़ेगा, यह कई कारकों (टैक्स) पर निर्भर करेगा, जैसे कि टैरिफ़ की दर, अमेरिकी सरकार की नीतियां और भारतीय फ़ार्मा कंपनियों की प्रतिक्रिया।
























