अगर सुप्रीम कोर्ट न होता तो…! कौन दिलाता न्याय, कौन रोकता सत्ता का दुरुपयोग?

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    देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले सुप्रीम कोर्ट की भूमिका को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। अगर देश में सुप्रीम कोर्ट न होता तो क्या होता? यह सवाल खुद में कई गंभीर संकेत देता है।

     

     

     

    *सुप्रीम कोर्ट की महत्वपूर्ण भूमिका*

     

    – संविधान की रक्षा का दायित्व सर्वोच्च न्यायालय को सौंपा गया है।

    – हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने कुछ अहम फैसले लेकर देश का ध्यान खींचा है, जैसे कि अवैध घुसपैठियों को शरण देने पर सरकार को चेतावनी।

    – इस्लामी वक्फ बोर्ड से जुड़े कानून पर भी कोर्ट में बहस जारी है।

    – राजस्थान के कोटा में छात्रों की आत्महत्याओं पर भी कोर्ट ने राज्य सरकार से तीखे सवाल किए।

     

     

     

    *सुप्रीम कोर्ट की संवेदनशीलता*

     

    – ईडी के बढ़ते दखल और दुरुपयोग पर भी सुप्रीम कोर्ट ने सख्ती दिखाई।

    – कोर्ट ने कहा कि दंड का मकसद सुधार है, भय नहीं।

    – यदि दंड का दुरुपयोग होगा तो उसका असर लोकतंत्र पर पड़ेगा।

     

     

     

    सुप्रीम कोर्ट की यही संवेदनशीलता इसे न्याय का प्रतीक बनाती है। अगर यह संस्था न होती, तो आम नागरिक के अधिकार और संविधान की आत्मा, दोनों खतरे में होते।

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