ट्रंप के टैरिफ पर मोदी का मास्टर स्ट्रोक

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भारत: आत्मनिर्भर भारत एक मज़बूत और विकसित भारत की नींव है। रक्षा, प्रौद्योगिकी, ऊर्जा, अंतरिक्ष एवं विनिर्माण के क्षेत्र में भारत ने जो प्रगति की है, वह हमें 2047 तक विकसित भारत बनाएगी।” 79वें स्वतंत्रता दिवस पर राष्ट्र को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया जैसे अभियानों पर ज़ोर देते हुए ये बात कही।

इसी भाषण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “हमारे युवाओं से मेरा आग्रह है कि भारत में ही जेट इंजन, सेमीकंडक्टर चिप और अन्य तकनीकी उत्पाद विकसित करें ताकि हम पूरी तरह से आत्मनिर्भर हो सकें।”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने भाषण में ये भी कहा कि आत्मनिर्भर भारत का मतलब आत्मकेंद्रित होना नहीं बल्कि दूसरे देशों के साथ सहयोग करते हुए अपनी ताक़त और स्वायत्तता को बढ़ाना है। भारत इस समय दुनिया की पांच सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है।

कार और फ़ोन के उत्पादन से लेकर टेक्सटाइल और खाद्य सुरक्षा के क्षेत्र में भारत ने पिछले कुछ सालों में उल्लेखनीय प्रगति की है। हालांकि वैश्विक अर्थव्यवस्था में हो रही उथल-पुथल और अमेरिका के भारत पर 50 फ़ीसदी टैरिफ़ लगाने के घटनाक्रम के बाद भारत में ‘स्वदेशी’ अपनाने का आह्वान हुआ है।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने एक बयान में कहा है, “जब हम स्वदेशी की बात करते हैं, तो इसका मतलब दूसरे देशों से संबंध खत्म करना नहीं है, बल्कि पारस्परिक आत्मनिर्भरता की बात है।”

भारत में मेक इन इंडिया कार्यक्रम पर भी ज़ोर है और सरकार ‘वोकल फॉर लोकल’ जैसे नारों के साथ भारत में निर्मित उत्पादों को बढ़ावा दे रही है। कृषि, खनन, लोहा और स्टील, ऑटो कंपोनेंट, औद्योगिक मशीनरी, फ़र्नीचर, लेदर और जूता उत्पादन, घरेलू स्तर पर रक्षा उत्पादन, आईटी और डिजिटल सेवा जैसे क्षेत्रों में भारत ने आत्मनिर्भरता हासिल की है।

लेकिन अभी भी कई क्षेत्र ऐसे हैं जहां भारत बहुत हद तक विदेशी कच्चे माल, तकनीक और शोध पर निर्भर है। भारत मोबाइल फ़ोन और आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के निर्माण के लिए ज़रूरी उच्च तकनीक वाले कच्चे माल, जैसे सेमीकंडक्टर चिप वगैरह का आयात करता है।

साथ ही, इन चीज़ों के आयात के लिए भारत बहुत हद तक चीन पर निर्भर है. इसकी वजह है, चीन की तकनीकी दक्षता और बेहद प्रतिस्पर्धी दरों पर इनके निर्माण की क्षमता।

भारत ने सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाने के लिए नीतिगत पहल की है। मेक इन इंडिया, इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन और प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (उत्पादन आधारित प्रोत्साहन) जैसी योजनाओं से सरकार भारत में सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स के उत्पादन के लिए इकोसिस्टम विकसित करने के प्रयास कर रही है।

एलिस्टा कंज़्यूमर प्रोडक्ट्स के सीएमडी साकेत गौरव कहते हैं, “हम स्मार्ट टीवी का उत्पादन करते हैं जिसके अहम पुर्ज़े हमें आयात करने पड़ रहे हैं। रॉ मैटेरियल सोर्सिंग की बात करें तो हमारे प्रोडक्ट में इस्तेमाल होने वाले कई कॉम्पोनेंट अभी भी इंपोर्ट हो रहे हैं। इंडिया में उनका उत्पादन अभी नहीं है।”

एलिस्टा ने हाल ही में 250 करोड़ रुपए की लागत से आंध्र प्रदेश के कडप्पा में एक प्रोडक्शन यूनिट शुरू की है। साकेत गौरव कहते हैं, “भारतीय ब्रांड के सामने एक चुनौती यह भी है कि बेहतर क्वालिटी होने के बावजूद घरेलू बाज़ार में ग्राहक विदेशी ब्रांड को तरजीह देते हैं।”

हालांकि, वो यह भी कहते हैं कि अगले पांच साल में भारत सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की तरफ़ बढ़ जाएगा। साकेत गौरव कहते हैं, “उम्मीद है पांच से छह साल में हम यहाँ अहम कंपोनेंट का उत्पादन कर पाएंगे। अभी इसमें टेक्नोलॉजी की कमी है, इसे प्रोसेस करने का इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं है। “साकेत गौरव कहते हैं, “भारतीय उत्पाद फॉरेन ब्रांड्स की तुलना में किफायती हैं, पर उपभोक्ता की प्राथमिकता विदेशी ब्रांड्स की ओर होती है।”

 

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