नई दिल्ली:मलेरिया के खिलाफ भारत ने एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। देश ने अपनी पहली स्वदेशी मलेरिया वैक्सीन विकसित कर ली है, जो प्लाज्मोडियम फाल्सीपेरम परजीवी के विरुद्ध प्रभावी मानी जा रही है। यह वैक्सीन सामुदायिक संक्रमण की श्रृंखला को तोड़ने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

 वैक्सीन का नाम और विशेषता

इस स्वदेशी वैक्सीन का नाम AdFalciVax (एडफाल्सीवैक्स) है। यह एक मल्टी‑स्टेज वैक्सीन है, जो संक्रमण और संचरण—दोनों चरणों पर कार्य करती है। वैक्सीन की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह कमरे के तापमान पर 9 महीने तक स्थिर रह सकती है, जिससे इसके भंडारण और परिवहन में आसानी होगी।

 किसने बनाई यह वैक्सीन?

इस वैक्सीन को ICMR‑RMRC भुवनेश्वर ने NIMR और NII जैसे प्रमुख संस्थानों के सहयोग से विकसित किया है। यह अब तक प्री-क्लिनिकल स्टेज में सफल रही है और अब इसे मानव परीक्षण यानी क्लिनिकल ट्रायल की ओर बढ़ाया जा रहा है।

 कब मिलेगी आम लोगों को?

फिलहाल यह वैक्सीन परीक्षण के चरण में है और आम जनता के लिए उपलब्ध होने में अभी समय लगेगा।
ICMR ने इसके उत्पादन के लिए निजी कंपनियों से आवेदन (EOI) मांगे हैं। एक बार तकनीकी हस्तांतरण और क्लिनिकल परीक्षण सफल होने के बाद ही यह वैक्सीन बाजार में उतारी जाएगी। विशेषज्ञों के अनुसार, इसमें 1 से 2 साल का समय लग सकता है।

 क्यों है यह वैक्सीन महत्वपूर्ण?

  • हर साल लाखों लोग मलेरिया से प्रभावित होते हैं, खासकर अफ्रीका और दक्षिण एशिया में।
  • यह वैक्सीन ना सिर्फ संक्रमण को रोकने में मदद करेगी बल्कि मलेरिया के प्रसार को भी नियंत्रित करेगी।
  • यह पूरी तरह स्वदेशी तकनीक पर आधारित है, जिससे भारत की आत्मनिर्भरता भी मजबूत होगी।

भारत की पहली स्वदेशी मलेरिया वैक्सीन AdFalciVax मलेरिया के खिलाफ लड़ाई में एक नई उम्मीद की किरण है। हालांकि यह अभी परीक्षण के चरण में है, लेकिन वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि यह वैक्सीन आने वाले वर्षों में लाखों जानें बचाने में सक्षम होगी।

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