भारत को हिंदू की पहचान बताते भागवत

0
57

भारत: भारत का राष्ट्रवाद का विचार बुनियादी तौर पर पश्चिमी व्याख्या से अलग है। पश्चिमी देश राष्ट्र को लेकर हमारे विचारों को नहीं समझते। इसलिए उन्होंने इसे राष्ट्रवाद कहना शुरू कर दिया। हमारे बीच इसे लेकर कोई मतभेद नहीं हैं। हम मानते हैं कि यह एक राष्ट्र है, जो प्राचीन समय से मौजूद है।

RSS प्रमुख मोहन भागवत ने शनिवार को नागपुर में आयोजित एक कार्यक्रम में बोल रहे थे। इस क्रम में श्री भागवत ने कहा कि हम राष्ट्रीयता शब्द का इस्तेमाल करते हैं, राष्ट्रवाद का नहीं और कहा कि देश को लेकर बहुत ज्यादा गर्व करने के खतरे को रेखांकित करते हुए कहा कि यह दो विश्वयुद्ध करा चुका है इसलिए कुछ लोग राष्ट्रवाद शब्द से डरते हैं।

मोहन भागवत ने समझाया, भारत का राष्ट्रीयता का बोध गर्व और अहंकार से नहीं, वरन् गहन आत्मचिंतन और प्रकृति के साथ सहअस्तित्व से उपजा है। संघ प्रमुख ने कहा कि झगड़ा या विवाद करना हमारे देश का स्वभाव नहीं है। भाईचारा और सामूहिक सद्भाव हमेशा से भारत की परंपरा रहा है। संघ प्रमुख ने कहा ‘हमारी किसी के साथ बहस नहीं होती। हम विवादों से दूर रहते हैं।

भागवत ने कहा कि दुनिया का इतिहास संघर्षों से बना है। वहां, जब एक राय बन जाती है तो फिर हर विचार को अस्वीकार कर दिया जाता है। याद करें कि पिछले दिनों संघ प्रमुख ने गुवाहाटी में कहा था कि जो भारत पर गर्व करता है, वह हिंदू है। भागवत ने हिंदू को सिर्फ एक धार्मिक नहीं बल्कि सभ्यतागत पहचान बताया था और साथ ही उन्होंने कहा कि भारत और हिंदू एक ही हैं।

हिंदू सिर्फ धार्मिक शब्द नहीं बल्कि एक सभ्यतागत पहचान है जिसमें कहा था कि भारत और हिंदू पर्यायवाची हैं। भारत को हिंदू राष्ट्र होने के लिए किसी आधिकारिक घोषणा की जरूरत नहीं है।

 

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here