नई दिल्ली: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) अब सिर्फ टेक्नोलॉजी या चैटबॉट्स तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह अब इंसानी जिंदगी में असंभव को संभव बना रहा है। हाल ही में एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने मेडिकल साइंस और तकनीक की दुनिया में हलचल मचा दी है। दरअसल, एक महिला जो बीते 18 वर्षों से मां बनने की उम्मीद में तमाम इलाज करा चुकी थी, उसकी उम्मीदें अब फिर से जिंदा हो गई हैं — और इसका श्रेय जाता है AI को। रिपोर्ट्स के मुताबिक, डॉक्टरों ने महिला के पति के स्पर्म से जुड़े सैंपल्स की दोबारा जांच कराई और इसमें AI की मदद ली गई।

AI ने खोजे “हिडन स्पर्म”

पारंपरिक माइक्रोस्कोपिक जांच में डॉक्टरों को मृत या निष्क्रिय स्पर्म ही नज़र आए थे। लेकिन जब AI आधारित इमेज प्रोसेसिंग तकनीक का इस्तेमाल किया गया, तो उसमें कुछ ऐसे “हिडन” स्पर्म मिले जो अब तक दिखाई नहीं दे रहे थे। AI तकनीक ने हाई-रिजोल्यूशन इमेजिंग और एल्गोरिदम की मदद से स्पर्म सेल्स की पहचान की और उनमें से जीवित कोशिकाओं को चिन्हित कर लिया। इसके बाद महिला का इलाज फिर से शुरू किया गया और अब उसके मां बनने की संभावनाएं काफी बढ़ गई हैं।

इनफर्टिलिटी से जूझ रहे लोगों के लिए नई उम्मीद

विशेषज्ञों का कहना है कि यह तकनीक उन कपल्स के लिए एक नई आशा है जो सालों से संतान सुख से वंचित हैं। यह खासकर उन मामलों में कारगर हो सकती है जहां पारंपरिक तकनीकों से कोई हल नहीं निकलता।

क्या है यह तकनीक?

AI आधारित यह तकनीक स्पर्म की पहचान और एनालिसिस के लिए डीप लर्निंग मॉडल्स का उपयोग करती है। यह न केवल स्पर्म की गुणवत्ता और गतिशीलता को जांच सकती है, बल्कि बहुत ही धीमी गति से हिलने वाले या छिपे हुए जीवित स्पर्म को भी ढूंढ निकालती है। यह मामला सिर्फ एक महिला की कहानी नहीं है, बल्कि लाखों उन दंपतियों के लिए रोशनी की किरण है जो इनफर्टिलिटी जैसी गंभीर समस्या से जूझ रहे हैं। यह साबित करता है कि अगर सही दिशा में तकनीक का उपयोग हो तो चमत्कार भी मुमकिन हैं।

 

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