झारखंड की राजनीति और समाज के लिए 15 अगस्त 2025 की शाम एक दुखद खबर लेकर आई। राज्य के शिक्षा मंत्री और झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के वरिष्ठ नेता रामदास सोरेन का दिल्ली के अपोलो अस्पताल में निधन हो गया। वे पिछले कुछ समय से अस्वस्थ चल रहे थे और इलाज के लिए दिल्ली में भर्ती थे। स्वतंत्रता दिवस के दिन शाम के समय उन्होंने अंतिम सांस ली।

झामुमो के पूर्व विधायक कुणाल षाड़ंगी ने उनके निधन की जानकारी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ के जरिए दी। जैसे ही यह खबर सामने आई, पूरे राज्य में शोक की लहर दौड़ गई। मुख्यमंत्री, मंत्रिमंडल के सहयोगी, विपक्षी नेता, पार्टी कार्यकर्ता और आम जनता ने गहरा दुख व्यक्त किया और उन्हें एक सरल, संवेदनशील और दूरदर्शी नेता के रूप में याद किया।
रामदास सोरेन झारखंड की राजनीति में एक मजबूत स्तंभ माने जाते थे। झामुमो के साथ उनका सफर लंबे समय तक चला और उन्होंने अपने कार्यकाल में विशेष रूप से शिक्षा के क्षेत्र में सुधार के लिए कई पहल कीं। ग्रामीण इलाकों में शिक्षा को मजबूत बनाने, स्कूलों की स्थिति सुधारने और छात्रों के लिए नई योजनाएं लागू करने में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा।
राजनीतिक जीवन के अलावा वे समाजसेवा में भी सक्रिय थे। आदिवासी समाज की समस्याओं को उठाने, युवाओं को शिक्षा से जोड़ने और गरीब वर्ग के अधिकारों के लिए वे हमेशा अग्रणी रहे। उनके निधन को झारखंड की राजनीति के लिए एक बड़ी क्षति माना जा रहा है। रामदास सोरेन के पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शन के लिए रांची लाया जाएगा, जहां हजारों लोग उन्हें श्रद्धांजलि देंगे। इसके बाद उनका अंतिम संस्कार उनके पैतृक गांव में किया जाएगा।
झारखंड के राजनीतिक इतिहास में उनका नाम हमेशा एक ऐसे नेता के रूप में लिया जाएगा, जिन्होंने शिक्षा और समाज सुधार को अपने कार्यकाल की प्राथमिकता बनाया और जीवन के अंतिम दिनों तक लोगों की सेवा में लगे रहे।





























