झारखंड की आदिवासी अस्मिता को अपूरणीय क्षति

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झारखंड: झारखंड मुक्ति मोर्चा के संस्थापक और संरक्षक आदिवासी चेतना के पुरोधा एवं गुरु शिबू सोरेन का निधन समस्त राज्य और देश के लिए एक अपूरणीय क्षति की बात है। उनका ऐसे छोड़ कर जाना केवल एक नेता का नहीं बल्कि एक विचार एवं एक आंदोलन और एक युग का अंत हो चुका है।

शिव सूर्य ने आदिवासी एवं मूल वासी एवं शोषण एवं दलित एवं मजदूर एवं किसान और महिलाओं की आवाज को काफी मजबूती देने में मदद की थी और उन्होंने अन्य और शोषण के खिलाफ जीवन भर संघर्ष किया था अब उनके नेतृत्व में हजारों लोगों ने अपने अधिकारो को भी पहचान और सामाजिक सम्मान पाया था।

 

गुरुजी नैना केवल समाज को हमेशा पढ़ाई की राह दिखाई थी बल्कि अज्ञानता से लड़ने की प्रेरणा भी दिया और आत्म सम्मान से जीने का सिख सिखाया था अब वह केवल एक राजनीतिक नेता नहीं थे बल्कि एक सामाजिक क्रांति के प्रतीक थे और शारीरिक रूप से भले ही हमारे बीच नहीं है लेकिन उनके विचार एवं शिक्षाएं और संघर्ष का जज्बा हमारे बीच हमेशा जीवित रहेगा।

महासचिव सा प्रवक्ता सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि – “गुरुजी अब भले ही हमारे बीच नहीं है लेकिन उनका दर्शन और संघर्ष की भावना हम सब में जीवित रहेगी”

ॐ शांति!

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