रांची, झारखंड | स्वच्छ भारत मिशन के तहत हर साल जारी होने वाले स्वच्छता सर्वेक्षण 2024 में रांची शहर की रैंकिंग में एक बार फिर गिरावट दर्ज की गई है। पिछली बार के मुकाबले रांची 5 स्थान फिसलकर अब 37वें पायदान पर आ गया है। बीते पांच वर्षों से रांची टॉप 30 शहरों में भी जगह नहीं बना पा रहा, जो नगर निगम की कार्यशैली और सफाई व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

करोड़ों खर्च फिर भी नतीजा ढाक के तीन पात!
नगर निगम हर महीने करीब 6 करोड़ रुपये सफाई व्यवस्था पर खर्च करता है। वहीं, पिछले कुछ वर्षों में 50 करोड़ रुपये से ज्यादा की लागत से आधुनिक सफाई मशीनें भी खरीदी गईं हैं। सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट की योजना को भी कागजों पर अमल में लाया गया है, लेकिन जमीनी स्तर पर हालात जस के तस बने हुए हैं।
कचरा उठाव व्यवस्था अब भी लचर
रोजाना शहर में सैकड़ों टन कचरा पैदा होता है, परन्तु नियमित कूड़ा उठाव नहीं हो पाने के कारण कई इलाकों में गंदगी का अंबार लगा रहता है। लोगों को बदबू और मच्छरों की समस्या झेलनी पड़ रही है।
क्या है रैंकिंग गिरने की वजह?
- कूड़ा उठाव में अनियमितता
- साफ-सफाई के प्रति नागरिकों में जागरूकता की कमी
- मशीनों का ठीक से उपयोग न होना
- शिकायतों का समय पर निपटारा न होना
- वेस्ट प्रोसेसिंग यूनिट्स की धीमी प्रगति
नागरिकों में नाराज़गी
स्थानीय नागरिकों ने नगर निगम पर लापरवाही का आरोप लगाया है। कई लोगों का कहना है कि “नालों की सफाई समय पर नहीं होती, सड़कों पर कूड़े के ढेर लगे रहते हैं। स्वच्छता सिर्फ पोस्टर और विज्ञापनों में दिखती है।”
आगे की राह?
अब जरूरत है पारदर्शिता, जवाबदेही और जनभागीदारी की। नगर निगम को मशीनरी और बजट का सही उपयोग करते हुए नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित करनी होगी। साथ ही, नागरिकों को भी स्वच्छता अभियान में सक्रिय भागीदार बनना होगा। स्वच्छता सिर्फ सरकारी योजनाओं से नहीं, नागरिकों की सहभागिता





























