पश्चिम बंगाल:पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में आयोजित होने वाला 629 वर्षों पुराना रथ मेला इस बार विवादों में घिर गया है। स्थानीय रिपोर्ट्स के अनुसार, यह मेला अल्पसंख्यक बहुल इलाके में होता है और इस बार प्रशासन की अनुमति नहीं मिलने से आयोजन में बाधा आई है।
धार्मिक स्वतंत्रता पर बहस:
स्थानीय हिंदू संगठनों ने इसे धार्मिक स्वतंत्रता का हनन बताते हुए आरोप लगाया कि राज्य सरकार जानबूझकर बहुसंख्यक समुदाय की धार्मिक भावनाओं को अनदेखा कर रही है। वहीं, कुछ समूहों का कहना है कि यह निर्णय “शांति व्यवस्था बनाए रखने” के नाम पर लिया गया है।
सांप्रदायिक सद्भाव बनाम तुष्टिकरण?
इस घटना ने भारतीय धर्मनिरपेक्षता की परिभाषा को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है — क्या त्योहारों पर रोक लगाना धर्मनिरपेक्षता है या तुष्टिकरण की राजनीति?

























