झारखंड में पत्थर खदानों से जुड़े रॉयल्टी, इंवायरमेंटल सेस और आयकर वसूली के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने लीजधारकों को दंडात्मक कार्रवाई से अस्थायी राहत दी है। सुप्रीम कोर्ट ने याचिका स्वीकार करते हुए राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है और मामले की सुनवाई जुलाई के अंतिम सप्ताह में करने का निर्णय लिया है।
यह मामला झारखंड हाईकोर्ट के उस आदेश से जुड़ा है, जिसमें पत्थर खदानों के 119 लीजधारकों से रॉयल्टी के अंतर, इंवायरमेंटल सेस और आयकर की वसूली को वैध करार दिया गया था। हाईकोर्ट ने यह फैसला 23 सितंबर 2025 को सुनाया था।
सभी याचिकाएं 2022 से 2024 के बीच दायर की गई थीं, जिनमें लीजधारकों ने सरकार द्वारा रॉयल्टी रेट बढ़ाने और बोल्डर पर 250 रुपये प्रति क्यूबिक मीटर की दर से वसूली के फैसले को चुनौती दी थी। लीजधारकों की मांग थी कि यह बढ़ी हुई दर उन पर लागू न हो जिनके पास स्टोन क्रशर नहीं हैं।
सुप्रीम कोर्ट में न्यायमूर्ति अभय एस ओका और उज्ज्वल भुयान की पीठ ने सुनवाई करते हुए कहा कि अगर राज्य सरकार कोई दंडात्मक कदम उठाती है, तो लीजधारक राहत के लिए अपील कर सकते हैं।
अब यह मामला जुलाई में फिर से कोर्ट में पेश होगा, जिससे यह तय होगा कि रॉयल्टी विवाद में सरकार का पक्ष टिकता है या लीजधारकों को राहत मिलती है।






























