भारत ने हाल ही में बांग्लादेश के साथ अपने आर्थिक संबंधों में एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। आठ अप्रैल को, भारत ने बांग्लादेश को उसके निर्यात किए जा रहे सामान के लिए दी गई ‘ट्रांसशिपमेंट’ सुविधा को वापस ले लिया है। यह सुविधा 2020 में शुरू की गई थी, जिससे बांग्लादेश के निर्यात को भारत के हवाई अड्डों और बंदरगाहों से होकर गुजरने की अनुमति मिली थी।
इस फैसले के पीछे का कारण बताते हुए विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि इस सुविधा के कारण भारत के हवाई अड्डों और बंदरगाहों पर काफी दिक्कतें पैदा हो रही थीं। हालांकि, यह निर्णय ऐसे समय में लिया गया है जब हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार प्रोफेसर मोहम्मद यूनुस से मिले थे, जिससे दोनों देशों के बीच संबंधों में सकारात्मकता की उम्मीद थी।
भारत और बांग्लादेश के बीच आर्थिक संबंध हमेशा से मजबूत रहे हैं। दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश के अवसर बढ़ रहे हैं, और भारत बांग्लादेश को एक महत्वपूर्ण आर्थिक भागीदार मानता है। 2017-18 में बांग्लादेश को भारत का निर्यात लगभग 8.4 बिलियन अमेरिकी डॉलर था, और इसी अवधि के दौरान बांग्लादेश से आयात लगभग 900 मिलियन अमेरिकी डॉलर था।
इसके अलावा, भारत और बांग्लादेश के बीच सीमा प्रबंधन और सुरक्षा सहयोग भी महत्वपूर्ण है। दोनों देशों ने सीमा पार अवैध गतिविधियों और अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण के लिए कई समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं। भारत-बांग्लादेश भूमि सीमा समझौता भी एक महत्वपूर्ण कदम है, जिससे सीमा प्रबंधन और तस्करी जैसी समस्याओं को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी।
हालांकि, ट्रांसशिपमेंट सुविधा वापस लेने के फैसले से दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों पर क्या प्रभाव पड़ेगा, यह देखना होगा। दोनों देशों के बीच संबंधों में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं, लेकिन दोनों देश अपने आर्थिक और सुरक्षा संबंधों को मजबूत बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं ।

























