मोदी की विदेश नीति पर सवाल, कूटनीति पर कांग्रेस का वार

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मोदी सरकार पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग करने में विफल साबित हुई है, जिस देश को विदेश मंत्री एस. जयशंकर दलाल बता रहे थे, उसी को दूसरी बार अमेरिका-ईरान शांति वार्ता की मेजबानी का मौका मिल रहा है। यह कहते हुए कांग्रेस संचार विभाग के प्रभारी जयराम रमेश ने सोमवार को मोदी सरकार पर हल्ला बोला।

जयराम रमेश कहा कि बारह अप्रैल को पहले दौर की वार्ता पूरी होने के बाद पाकिस्तान ने सऊदी अरब और कतर से छह अरब डॉलर का कर्ज लिया, ताकि संयुक्त अरब अमीरात (UAEके 3.5 अरब डॉलर के कर्ज को चुका सके और 1.43 अरब डॉलर के यूरोबॉन्ड की एक किश्त का भुगतान कर सके।

जयराम रमेश ने कहा कि पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था गंभीर संकट में है वह मित्र देशों की सहायता पर निर्भर है। इसके बावजूद वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अहम कूटनीतिक भूमिका निभा रहा है।

उन्होंने कहा कि यह वही पाकिस्तान है, जिसने ओसामा बिन लादेन सहित सभी आतंकवादियों को शरण दी, पाकिस्तान ने अफगानिस्तान में ड्रग पुनर्वास केंद्रों पर बमबारी की। उसने पहलगाम आतंकवादी हमले की साजिश रची।

जयराम रमेश ने यह सब गिनाते हुए यह स्पष्ट है कि मोदी सरकार की क्षेत्रीय और वैश्विक कूटनीति पाकिस्तान को अलग-थलग करने में विफल रही है। जबकि, नवंबर 2008 के मुंबई आतंकवादी हमले के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के समय भारत ने पाकिस्तान पर प्रभावी दबाव बनाया था।

कांग्रेस नेता ने जयराम रमेश चिंता जताते हुए कहा कि पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर अब डोनाल्ड ट्रंप के करीबी माने जा रहे हैं। पाकिस्तान ने ट्रंप परिवार और उनके करीबी नेटवर्क के साथ संबंध बनाने में भारत की तुलना में अधिक सफलता पायी है।

उन्होंने कहा, इसे भी प्रधानमंत्री मोदी की विदेश नीति के लिए झटका माना जाना चाहिए। कहा कि भारत को अपनी कूटनीतिक रणनीति और तौर-तरीकों में व्यापक बदलाव की जरूरत है। लेकिन, मौजूदा नेतृत्व (मोदी सरकार) सक्षम नहीं दिख रहा है।

 

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