देश विदेश: गल्फ वार को लेकर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा अपने कुछ सहयोगी देशों से Strait of Hormuz में अपने युद्धपोत तैनात करने की मांग किये जाने की सूचना है। ट्रंप का कहना है कि सभी देश अपनी नौसेना भेजकर इस रास्ते को सुरक्षित करें।
जानकारी के अनुसार, अमेरिका के सहयोगी माने जाने वाले ये देश फूंक फूंक कर कदम रख रहे हैं, वे अपने हाथ इस युद्ध में जलाना नहीं चाहते। दरअसल अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने एयरफोर्स वन में पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि जो देश अपनी तेल जरूरतों के लिए मध्य पूर्व पर निर्भर हैं।
उन्हें इस रास्ते की सुरक्षा में मदद के लिए सामने आना चाहिए, ट्रंप का तर्क दिया कि इन देशों को अपने हितों की रक्षा खुद करनी चाहिए। उन्होंने यह बात साफ कर दी कि अमेरिका इस रास्ते पर उतना निर्भर नहीं है जितना दूसरे बड़े देश हैं।
ट्रंप ने चीन का नाम लेते हुए कहा कि चीन तेल सप्लाई का बड़ा हिस्सा Strait of Hormuz से मंगवाता है। हालांकि, ट्रंप ने इस बात पर कुछ नहीं कहा कि चीन इस गठबंधन का हिस्सा बनेगा या नहीं, अहम बात यह है कि ट्रंप के आह्वान पर अभी तक किसी भी देश ने सेना भेजने का वादा नहीं किया है।
इस संबंध में, ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने कहा, होर्मुज स्ट्रेट के लिए एक विश्वसनीय योजना बनाने के लिए काम किया जा रहा है। ताकि, जहाजों का सुरक्षित आवागमन फिर से शुरू किया जा सके। साथ ही, उन्होंने इस बात को स्पष्ट किया कि यह नाटो मिशन कतई नहीं होगा और न ही कभी ऐसा सोचा गया है।
यह महज साझेदारों का एक गठबंधन होगा। स्टार्मर मे कहा कि हम यूरोप, खाड़ी देशों और अमेरिका में साझेदारों के साथ काम कर रहे हैं मेरी राष्ट्रपति ट्रंप के साथ अच्छी चर्चा हुई है। जो जानकारी सामने आयी है, उसके अनुसार ऑस्ट्रेलिया ने गल्फ क्षेत्र में नौसैनिक सहायता देने से इनकार कर दिया है।
ऑस्ट्रेलिया के कैबिनेट मंत्री कैथरीन किंग मानना है कि यह समुद्री रास्ता महत्वपूर्ण है। लेकिन, ऑस्ट्रेलिया की इलाके में जहाज भेजने की कोई योजना नहीं है, यह भी कहा कि इस संबंध में कोई औपचारिक अनुरोध नहीं मिला है।
जापान के प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची ने सोमवार को अपनी संसद में यह बात साफ कर दी कि अभी पश्चिम एशिया में जहाजों की आवाजाही की सुरक्षा के लिए युद्धपोत भेजने का कोई इरादा नहीं है।
जापान ने अभी तक किसी भी सैन्य भागीदारी में शामिल होने का निर्णय नहीं लिया है। हालांकि, दक्षिण कोरिया का इस मामले में रुख कुछ अलग है। उसने कहा है कि वह इस मसले पर अमेरिका के साथ बातचीत कर रहा है। सियोल के राष्ट्रपति कार्यालय के बयान के अनुसार किसी भी तरह का फैसला लेने से पहले स्थिति की गहराई से समीक्षा करेंगे।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल से सोमवार को कहा कि हम इस मामले में कई देशों की ओर से की जा रही चर्चा से अवगत हैं। प्रवक्ता ने कहा कि भारत ने होर्मुज मार्ग से शिप के सुरक्षित आवागमन को सुनिश्चित करने के लिए नौ सैनिक जहाजों की तैनाती के संबंध में अमेरिका के साथ द्विपक्षीय चर्चा नहीं की है।



























