वक्फ कानून पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा सवाल: हिंदू ट्रस्ट में मुसलमान और गैर-हिंदू हो सकते हैं शामिल?

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सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को वक्फ संशोधन अधिनियम, 2025 पर पहली सुनवाई की, जिसमें कई महत्वपूर्ण टिप्पणियां की गईं। मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव खन्ना की पीठ ने कहा कि वे इस कानून से जुड़ी कुछ धाराओं पर अंतरिम आदेश जारी करने पर विचार कर रहे हैं। सुनवाई के दौरान, याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल, राजीव धवन और अभिषेक मनु सिंघवी पेश हुए।

 

 

 

 

*सुनवाई के मुख्य बिंदु:*

 

– *वक्फ संशोधन अधिनियम की धाराओं पर आपत्ति*: कपिल सिब्बल ने तर्क दिया कि संसदीय अधिनियम के माध्यम से आस्था के आवश्यक और अभिन्न अंगों पर हस्तक्षेप किया जाता है, जो संविधान के अनुच्छेद 26 का उल्लंघन करता है।

– *वक्फ-बाय-यूजर पर विवाद*: सिब्बल ने पूछा कि वक्फ-बाय-यूजर की अनुमति क्यों नहीं दी जा सकती, जबकि अभिषेक मनु सिंघवी ने तर्क दिया कि वक्फ-बाय-यूजर को हटाने से करीब चार लाख संपत्तियां अवैध हो जाएंगी।

– *सरकारी संपत्ति पर दावा*: सिब्बल ने कहा कि सरकारी संपत्ति के रूप में पहचानी गई संपत्ति वक्फ संपत्ति नहीं होगी और सरकार का प्राधिकारी विवाद का फैसला करेगा, जो असंवैधानिक है।

– *अनुसूचित जनजातियों की संपत्तियों पर वक्फ*: सिब्बल ने आपत्ति जताई कि अनुसूचित जनजातियों की संपत्तियों पर वक्फ के निर्माण पर रोक लगाई गई है, जो आदिवासी सदस्यों की संपत्तियों के हस्तांतरण पर रोक नहीं लगाती है।

 

 

 

 

 

 

 

*केंद्र सरकार की प्रतिक्रिया:*

 

– *सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता*: केंद्र सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने निवेदन किया कि इस मामले में कोई भी आदेश जारी करने से पहले उनको भी सुन लिया जाए।

– *हिंदू समुदाय के धार्मिक ट्रस्ट में मुसलमान या गैर हिंदू को जगह देने पर विचार*: सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा कि क्या वे हिंदू समुदाय के धार्मिक ट्रस्ट में मुसलमान या गैर हिंदू को जगह देने पर विचार कर रहे हैं।

 

अब इस मामले पर गुरुवार को फिर सुनवाई होगी, जिसमें सुप्रीम कोर्ट आगे की कार्रवाई तय करेगी ।

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