अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कतर के दोहा में एक बयान दिया है, जिसमें उन्होंने कहा है कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव को शांत करने में मदद की थी, लेकिन उन्होंने मध्यस्थता नहीं कराई। ट्रंप ने कहा, “मैं नहीं कह रहा कि मैंने किया, लेकिन यह पक्का है कि पिछले सप्ताह भारत-पाकिस्तान के बीच जो हुआ, मैंने उसे सैटल करने में मदद की।”
ट्रंप के पहले के बयान से पलटने पर बवाल
ट्रंप ने पहले दावा किया था कि उन्होंने व्यापार में कटौती का मुद्दा उठाकर दोनों देशों को शत्रुता समाप्त करने के लिए मजबूर किया था। उन्होंने कहा था कि अगर वे युद्धविराम पर सहमत होते हैं तो अमेरिका उनके साथ व्यापार में मदद करेगा और अगर नहीं मानेंगे तो उनके साथ कोई व्यापार नहीं होगा। ट्रंप के इस बयान के बाद भारत में हंगामा मच गया था और कांग्रेस ने विदेश नीति की विफलता करार देते हुए मोदी सरकार पर हमलावर हो गई थी।
भारत सरकार का जवाब
भारत सरकार ने ट्रंप के दावे को खारिज कर दिया था और कहा था कि पाकिस्तान के साथ सैन्य तनाव के दौरान भारत और अमेरिका के बीच किसी भी चर्चा के दौरान ट्रेड का मसला नहीं उठा था। विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा था कि 7 मई को ऑपरेशन सिंदूर शुरू होने से लेकर 10 मई को गोलीबारी और सैन्य कार्रवाई बंद करने पर सहमति बनने तक भारतीय और अमेरिकी नेताओं के बीच उभरते सैन्य हालात पर बातचीत होती रही, लेकिन किसी भी चर्चा में व्यापार का मुद्दा नहीं उठा।
ट्रंप के बयान का महत्व
ट्रंप के बयान का महत्व इसीलिए भी है क्योंकि उन्होंने माना है कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच सीजफायर में मदद की थी, लेकिन मध्यस्थता नहीं कराई। यह बयान भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव को कम करने में अमेरिका की भूमिका को लेकर कई सवाल उठाता है।

























