JJMP के सब जोनल कमांडर लवलेश गंझु ने किया आत्मसमर्पण, 50 से अधिक मामलों में था वांछित

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 झारखंड : झारखंड के उग्रवाद प्रभावित इलाकों में एक बड़ी सफलता तब मिली जब प्रतिबंधित उग्रवादी संगठन झारखंड जनमुक्ति परिषद (JJMP) के सब जोनल कमांडर लवलेश गंझु उर्फ लवकेश गंझु ने मंगलवार को पुलिस और केंद्रीय अर्द्धसैनिक बलों के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया। यह आत्मसमर्पण लातेहार जिले में हुआ और इसे सरकार की पुनर्वास नीति की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है।

50 से अधिक संगीन मामलों में था शामिल

लवलेश पर हत्या, पुलिस पर हमला, आगजनी, रंगदारी, सड़क निर्माण में बाधा, लेवी वसूली और धमकी जैसे 50 से अधिक संगीन आपराधिक मामले दर्ज हैं। ये मामले लातेहार, गढ़वा, पलामू और चतरा जिलों के विभिन्न थानों में दर्ज हैं। वह लम्बे समय से झारखंड पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों के लिए सिरदर्द बना हुआ था और झारखंड सरकार ने उस पर इनाम भी घोषित कर रखा था।

आत्मसमर्पण का आयोजन

आत्मसमर्पण का आयोजन लातेहार पुलिस लाइन स्थित सभागार में किया गया, जहां लवलेश ने औपचारिक रूप से पुलिस महानिरीक्षक (IG), पलामू प्रमंडल श्री सुनील भास्कर, लातेहार के पुलिस अधीक्षक श्री अनिरुद्ध कुमार, CRPF की 11वीं बटालियन के समादेष्टा, और SSB की 32वीं बटालियन के कमांडेंट के समक्ष अपने हथियार डालकर आत्मसमर्पण किया। इस अवसर पर लवलेश को झारखंड सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति 2022 के तहत स्वागत स्वरूप साफा, शॉल और फूलमाला पहनाकर सम्मानित किया गया। अधिकारियों ने उसे एक प्रोत्साहन राशि और प्रमाण पत्र भी सौंपा।

IG सुनील भास्कर का संदेश

आईजी सुनील भास्कर ने कहा, “यह आत्मसमर्पण झारखंड पुलिस और सुरक्षाबलों की रणनीति की जीत है। यह दिखाता है कि राज्य में उग्रवाद धीरे-धीरे कमजोर हो रहा है और नक्सली संगठन अब बिखराव की कगार पर हैं। हम चाहते हैं कि बाकी उग्रवादी भी मुख्यधारा में लौटें और सरकार की पुनर्वास नीति का लाभ उठाएं।” उन्होंने बताया कि लवलेश की आत्मसमर्पण की प्रक्रिया पूरी तरह से स्वैच्छिक रही और सरकार की नीति से प्रभावित होकर उसने हिंसा का रास्ता छोड़ने का निर्णय लिया।

पूर्व में था खूंखार उग्रवादी, अब चाहता है सामान्य जीवन

मूल रूप से लातेहार जिले के ही एक गांव का रहने वाला लवलेश काफी कम उम्र में नक्सल संगठन से जुड़ गया था। उसे बम बनाना, रणनीतिक हमला करना, और इलाके में लेवी वसूली की जिम्मेदारी दी गई थी। आत्मसमर्पण के बाद लवलेश ने कहा: “अब मैं हिंसा छोड़कर सामान्य जीवन जीना चाहता हूं। मुझे समाज के बीच रहकर शांति से जीवन बिताना है। सरकार की नीति और पुलिस अधिकारियों के व्यवहार से मुझे विश्वास हुआ कि मैं दोबारा एक बेहतर इंसान बन सकता हूं।”

पुनर्वास नीति के तहत मिलेगी सहायता

झारखंड सरकार की पुनर्वास नीति के तहत लवलेश को घर, मासिक भत्ता, पेशेवर प्रशिक्षण, और नौकरी में सहायता जैसी कई सुविधाएं मिलेंगी। इस नीति का उद्देश्य यह है कि उग्रवाद की ओर बढ़े युवाओं को मुख्यधारा में लाकर उन्हें समाज के लिए उपयोगी नागरिक बनाया जा सके।

सुरक्षा एजेंसियों को उम्मीद

इस आत्मसमर्पण से पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों को उम्मीद है कि JJMP समेत अन्य संगठनों के सक्रिय सदस्य भी अब आगे आकर आत्मसमर्पण करेंगे। लातेहार, गढ़वा, चतरा और पलामू जैसे नक्सल प्रभावित जिलों में यह आत्मसमर्पण अभियान को और अधिक गति देगा।

समापन संदेश

यह आत्मसमर्पण राज्य सरकार और सुरक्षा एजेंसियों की संयुक्त पहल की एक बड़ी सफलता है। अब उम्मीद की जा रही है कि उग्रवाद से प्रभावित झारखंड के ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में शांति और विकास की नई रोशनी फैलेगी। अधिकारी लगातार अपील कर रहे हैं कि बाकी उग्रवादी भी हथियार छोड़कर समाज की मुख्यधारा में शामिल हों और एक नई शुरुआत करें।

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