भू-माफिया की धरपकड़ में फेल हुई पुलिस: सुप्रीम कोर्ट से जमानत रद्द होने के 2 साल बाद भी नहीं हुई गिरफ्तारी, SIT का गठन

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बोकारो: झारखंड में भू-माफिया के हौसले बुलंद हैं। सुप्रीम कोर्ट से जमानत रद्द होने के 2 साल बाद भी भू-माफिया धनंजय प्रसाद फौलाद सहित अन्य की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है। यह मामला बोकारो जिले के बांधगोड़ा मौजा से संबंधित है, जहां 18 एकड़ जमीन की जालसाजी कर बेचने का आरोप है।

 

 

 

 

जिला प्रशासन ने फौलाद सहित अन्य के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी। आरोप है कि फौलाद ने अपने साथियों के साथ मिलकर छह एकड़ के पावर ऑफ अटॉर्नी के सहारे 18 एकड़ जमीन बेच दी। इस मामले में हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दायर की गई थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने 2023 में अभियुक्तों की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी।

 

 

 

 

इसके बावजूद भी अभियुक्तों की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है। इस मामले में कई जांच अधिकारियों के तबादले हुए और प्राथमिकी को झूठ करार देने की कोशिश की गई। लेकिन हंगामा होने के बाद मार्च 2025 में मामले की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया गया।

 

 

 

 

एसआईटी में बोकारो स्टील सिटी थाना के प्रभारी सुदामा दास सहित कई पुलिस अधिकारी शामिल हैं। अब देखना यह है कि एसआईटी की जांच में क्या परिणाम निकलते हैं और भू-माफिया के खिलाफ क्या कार्रवाई होती है। इस मामले में पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं कि आखिरकार अभियुक्तों की गिरफ्तारी क्यों नहीं हो सकी है।

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