डॉ. बाबा साहेब आंबेडकर को किताबों का बहुत शौक था। उनकी लाइब्रेरी में करीब 50 हजार से अधिक किताबें थीं, जो उनके घर राजगृह में रखी हुई थीं। आंबेडकर की किताबों में रुचि बचपन से ही थी, और जैसे-जैसे उनकी उम्र बढ़ती गई, उनका लगाव भी बढ़ता गया।
आंबेडकर न केवल एक महान नेता थे, बल्कि एक प्रभावशाली लेखक भी थे। उन्होंने विभिन्न विषयों पर कई पुस्तकें लिखीं, जिनमें से कुछ प्रमुख पुस्तकें हैं:
– *प्रमुख पुस्तकें:*
– “एनिहिलेशन ऑफ कास्ट” (जाति का विनाश)
– “द बुद्ध एंड हिज धम्म” (भगवान बुद्ध और उनका धर्म)
– “कास्ट इन इंडिया” (भारत में जाति)
– “हू वेअर द शूद्राज?” (शूद्र कौन थे?)
– “रिडल्स इन हिंदुइज़म” (हिंदू धर्म में रहस्य)

आंबेडकर की किताबें न केवल उनके समय में प्रसिद्ध थीं, बल्कि आज भी पूरे विश्व में पढ़ी जाती हैं। उनकी पुस्तकें सामाजिक संघर्ष और दलितों के अधिकारों पर केंद्रित थीं।
आंबेडकर की लाइब्रेरी और उनके लेखन ने उन्हें एक अद्वितीय व्यक्तित्व बनाया। वह अपनी किताबों को बहुत महत्व देते थे और उन्हें पढ़ने के लिए किसी को भी उधार नहीं देते थे। उनकी किताबों की कीमत का अनुमान लगाना मुश्किल है, लेकिन यह निश्चित है कि उनकी लाइब्रेरी एक अमूल्य धरोहर थी।
- आज, आंबेडकर की पुस्तकें और उनके विचार पूरे भारत में प्रेरणा का स्रोत हैं। उनकी विरासत न केवल एक नेता के रूप में, बल्कि एक लेखक और विचारक के रूप में भी जीवित है।


























