अमेरिकी ने भारत पर 25% टैरिफ लागू करने का ऐलान कर दिया है, जो 1 अगस्त से प्रभावी होगा। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के इस फैसले से भारत के कई प्रमुख निर्यात क्षेत्रों पर बड़ा असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार भारत को सालाना निर्यात में 2 से 7 अरब डॉलर तक की गिरावट हो सकती है। गौरतलब है कि भारत ने 2023-24 में अमेरिका को लगभग 77.52 अरब डॉलर का सामान एक्सपोर्ट किया था, जो देश के कुल निर्यात का लगभग 18% हिस्सा है।

किन सेक्टर्स पर पड़ेगा सबसे ज्यादा असर?
- टेक्सटाइल, गारमेंट्स और कारपेट
भारत इन क्षेत्रों में दुनिया के प्रमुख निर्यातकों में से एक है। अमेरिका भारत से बड़ी मात्रा में कपड़े, जूते और कारपेट खरीदता है। 25% टैरिफ के बाद ये उत्पाद अमेरिकी बाजार में महंगे हो जाएंगे, जिससे भारतीय कंपनियों के ऑर्डर और शिपमेंट पर सीधा असर पड़ सकता है।
- ज्वेलरी और डायमंड
भारत सबसे ज्यादा हीरे और ज्वेलरी एक्सपोर्ट करने वाला देश है। अमेरिका भी इन उत्पादों का बड़ा खरीदार है। अब टैरिफ बढ़ने से इनकी कीमतें बढ़ेंगी और अमेरिकी ग्राहक भारत की जगह अन्य विकल्पों की ओर रुख कर सकते हैं।
- ऑटोमोबाइल और ऑटो पार्ट्स सेक्टर
स्टील और एल्युमिनियम पर पहले से ही 25% का टैरिफ लागू था, अब ऑटोमोबाइल सेक्टर भी इसकी चपेट में आ गया है। इससे अमेरिका में भारतीय ऑटो उत्पादों की डिमांड घट सकती है।
- मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स
भारत हर साल अमेरिका को करीब 14 अरब डॉलर के मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद एक्सपोर्ट करता है। टैरिफ लागू होने से ये प्रोडक्ट महंगे हो जाएंगे और भारत की प्रतिस्पर्धा घट सकती है।
- केमिकल सेक्टर
केमिकल उत्पादों पर भी टैरिफ का सीधा असर पड़ेगा। इससे इस क्षेत्र में भी ऑर्डर कम होने की आशंका है।
- अब टैरिफ के दायरे में आ सकते हैं ये सेक्टर्स भी अब तक दवाइयां (फार्मा), सेमीकंडक्टर, ऊर्जा उत्पाद (तेल, गैस, कोयला), कॉपर जैसे सेक्टर टैरिफ से छूट में थे। लेकिन 1 अगस्त से इनमें भी टैरिफ लागू हो सकता है, जिससे इन क्षेत्रों के निर्यात पर भी असर पड़ेगा।
- कितना बड़ा हो सकता है नुकसान?
जानकारों का कहना है कि भारत को सालाना 2 से 7 अरब डॉलर तक का निर्यात नुकसान हो सकता है। यह फैसला भारत के लिए आर्थिक रूप से एक बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि अमेरिका भारत का सबसे बड़ा निर्यात बाजार है। विशेषज्ञों ने भारत सरकार से जल्द रणनीतिक बातचीत और व्यापार नीतियों में सुधार की मांग की है ताकि नुकसान को सीमित किया जा सके।


























