भारत: UGC में लागू किये गए नए नियम मोदी सरकार के गले के हड्डी बन गये हैं। भाजपा के अंदर भी इसका विरोध हो रहा है। हालांकि, विपक्ष चुप्पी साधे बैठा है। नये नियम सामान्य वर्ग के छात्रों के खिलाफ बताया जा रहा है।
UGC के अनुलार नये नियम उच्च शिक्षा में जातिगत भेदभाव रोकने और समानता बढ़ाने के लिए लाया है। दिल्ली, यूपी, बिहार, राजस्थान और मध्य प्रदेश आदि राज्यों में पिछले कई दिनों से UGC के खिलाफ सामान्य वर्ग के छात्र धरना-प्रदर्शन दे रहे है।
विरोध मार्च निकाले जा रहे हैं। खबर है यूपी में कई जगहों पर भाजपा के पदाधिकारियों ने इस्तीफे दे दिये हैं। UGC के नये नियमों के विरोध में आज मंगलवार को बहादुर शाह जफर मार्ग पर स्थित विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन शुरू हो गया।
छात्र अपने हाथों में तख्तियां लिये हुए नारेबाजी शुरू कर दी। छात्रों ने UGC के ‘उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने के नियम, 2026 के खिलाफ गुस्सा जाहिर किया। यह नियम 15 जनवरी 2026 से लागू हुआ है, जिसे लेकर देशभर में हंगामा हो रहा है।
छात्र सवर्ण विरोधी UGC नियम वापस लो, उच्च शिक्षा में समानता नहीं, विभाजन आदि नारे लगा रहे थे। UGC मुख्यालय के बाहर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है।
नए नियमों में शिकायत निवारण तंत्र, असमानता के खिलाफ कार्रवाई और वंचित वर्गों को समर्थन का प्रावधान किया गया है और इस पर विरोध करने वाले, खासकर सामान्य वर्ग के छात्रों का कहना है कि यह नियम उल्टा भेद्भाव पैदा करनेवाला है।
उनका कहना है कि इसमें झूठी शिकायत किये जाने के मामले में पर्याप्त सुरक्षा नहीं है, जिससे निर्दोष छात्र या शिक्षक फंस सकते हैं। प्रदर्शनकारी इसे एकतरफा और भेदभावपूर्ण करार दे रहे हैं।






























