जयपुर: राज्य सरकार द्वारा कक्षा 1 से 8 तक के सभी विद्यार्थियों और कक्षा 9 से 12 तक की छात्राओं को यूनिफॉर्म (सिलाई सहित) और स्कूल बैग खरीदने हेतु ₹800 की सहायता राशि देने की घोषणा की गई थी। यह राशि डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से विद्यार्थियों के बैंक खातों में ट्रांसफर की जानी थी। योजना का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों को आत्मसम्मान के साथ शिक्षा से जोड़ना है। राज्यभर में लगभग 70 लाख विद्यार्थियों को इस योजना का लाभ मिलना था, लेकिन अब तक 14 लाख बच्चों के खातों में यह राशि नहीं पहुंच सकी है। इसका मुख्य कारण जनाधार से बैंक खाते का लिंक और अधिप्रमाणन न होना बताया जा रहा है।

जनाधार लिंकिंग में गड़बड़ी बनी बड़ी बाधा
शिक्षा विभाग के अनुसार वित्तीय सहायता पाने के लिए विद्यार्थी का बैंक खाता जनाधार से लिंक और अधिप्रमाणित होना अनिवार्य है। हालांकि, कई विद्यार्थियों के खाते अभी तक अधिप्रमाणित नहीं हो पाए हैं। इस तकनीकी खामी के कारण 14 लाख विद्यार्थी योजना से वंचित रह गए हैं।
शिक्षा विभाग ने दिखाया सख्त रुख
इस देरी पर अब शिक्षा विभाग ने सख्त रुख अपनाया है। सभी जिला शिक्षा अधिकारियों (DEO) और जिला परियोजना समन्वयकों को निर्देश दिए गए हैं कि वे बकाया जनाधार अधिप्रमाणन कार्य को शीघ्र पूरा करें। इसके लिए शाला दर्पण पोर्टल पर निगरानी और त्वरित कार्रवाई की जिम्मेदारी दी गई है। यदि किसी भी स्तर पर लापरवाही पाई गई, तो अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। शिक्षा विभाग ने सभी स्कूलों को निर्देशित किया है कि वे विद्यार्थियों और अभिभावकों को अभियान चलाकर जागरूक करें, ताकि कोई भी पात्र बच्चा योजना से वंचित न रह जाए।
लक्ष्य: 100% पात्र विद्यार्थियों को लाभ
राज्य सरकार की मंशा है कि कोई भी विद्यार्थी हीन भावना का शिकार न हो और सभी को समान रूप से शिक्षा के संसाधन प्राप्त हों। इसी कारण सरकार अब योजना के लाभ शत-प्रतिशत बच्चों तक पहुँचाने के लिए डीबीटी पर सख्त निगरानी रखने जा रही है। यह योजना केवल आर्थिक सहायता ही नहीं बल्कि शिक्षा के क्षेत्र में समानता और आत्मविश्वास को भी बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।































