रांची : झारखंड में पिछले 35 वर्षों के दौरान भीषण गर्मी (हीटवेव) की घटनाओं में 300 प्रतिशत की चौंकाने वाली वृद्धि दर्ज की गई है। यह जानकारी सेंटर फॉर एनवायरनमेंट एंड एनर्जी डेवलपमेंट (सीईईडी) द्वारा मंगलवार को आयोजित एक स्टेकहोल्डर कंसल्टेशन कार्यक्रम में सामने आई।
कार्यक्रम के दौरान सीईईडी द्वारा जारी रिपोर्ट ‘स्कॉर्चिंग रियलिटी : राइजिंग हीटवेव्स इन इंडिया – द केस ऑफ झारखंड’ में बताया गया कि 1990 से 2024 के बीच राज्य में कुल 590 दिन हीटवेव दर्ज की गई। यह आंकड़ा हीटवेव की बढ़ती आवृत्ति को दर्शाता है।
महीनों के अनुसार हीटवेव के दिन:
मई: 275 दिन
अप्रैल: 183 दिन
जून: 132 दिन
सबसे अधिक प्रभावित जिले:
गढ़वा, पलामू, लातेहार और सिमडेगा जैसे पश्चिमी व मध्य झारखंड के जिले सबसे ज्यादा प्रभावित पाए गए। वहीं, पूर्वी जिले जैसे गोड्डा और साहिबगंज में तुलनात्मक रूप से कम हीटवेव देखी गई।
इस कार्यक्रम में वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग, भारतीय मौसम विज्ञान केंद्र (रांची), सार्वजनिक स्वास्थ्य संस्थान और सामुदायिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।
विशेषज्ञों की राय:
सेवानिवृत्त आईएफएस अधिकारी एवं झारखंड सरकार के सस्टेनेबल जस्ट ट्रांजिशन टास्क फोर्स के अध्यक्ष ए.के. रस्तोगी ने कहा कि हीटवेव का सबसे ज्यादा असर गरीब और असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों पर पड़ता है। उन्होंने संवेदनशील जिलों के लिए विशेष कार्ययोजना की आवश्यकता पर जोर दिया।
स्टेट नोडल ऑफिसर फॉर क्लाइमेट चेंज, श्री रवि रंजन ने जलवायु अनुकूलन रणनीतियों को मजबूत करने की बात कही।
सीईईडी के सीईओ रमापति कुमार ने कहा कि प्रभावी जलवायु कार्रवाई के लिए वैज्ञानिक आंकड़ों, स्थानीय अनुभवों और सामुदायिक समझ को एक मंच पर लाना जरूरी है।



























