रांची: भारत के उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन अपने रांची दौरे के दौरान धरती आबा की जन्मस्थली उलिहातू (खूंटी) पहुंचे, जहां, उन्होंने महान स्वतंत्रता सेनानी बिरसा मुंडा की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की।
इस दौरान, उनके साथ राज्यपाल राधाकृष्ण किशोर, स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी और राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह मौजूद रहे। इसके बाद, उन्होंने भगवान बिरसा मुंडा के वंशजों से भी मुलाकात की और उनका हालचाल जाना। इससे पहले खूंटी में सीपी राधाकृष्णन का भव्य स्वागत किया गया। साथ ही, उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया।
उपराष्ट्रपति ने एक्स हैंडल पर फोटो शेयर कर कहा कि बिरसा मुंडा की पवित्र जन्मभूमि की यात्रा उनके लिए भावविभोर अनुभव रही। उन्होंने महान सेनानी को अपनी गहरी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनका जीवन और बलिदान पीढ़ियों के लिए प्रेरणा स्रोत रहेगा।
सीपी राधाकृष्णन ने याद दिलाया कि झारखंड के राज्यपाल के रूप में शपथ ग्रहण करने के दिन भी उन्होंने उलिहातू का दौरा किया था, जो उनके लिए अत्यंत महत्वपूर्ण अनुभव था। यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2021 में बिरसा मुंडा की जयंती (15 नवंबर) को जनजातीय गौरव दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया।
पीएम मोदी के इस निर्णय ने आदिवासी विरासत के प्रति राष्ट्रीय जागरूकता और गौरव को बढ़ाया है। उन्होंने कहा कि मुझे पीएम मोदी के साथ खूंटी जाने का भी सौभाग्य प्राप्त हुआ, जब उन्होंने पीएम-जनमान योजना की घोषणा की, जो विशेष रूप से कमजोर आदिवासी समुदायों की रक्षा और सशक्तिकरण के उद्देश्य से एक परिवर्तनकारी पहल है।
पीढ़ियों से चले आ रहे आदिवासी स्वतंत्रता सेनानियों की समृद्ध विरासत और संघर्षों के प्रति गौरव और जागरूकता पैदा करने के साथ-साथ इस अमृत काल के दौरान, आदिवासी समुदायों को सशक्त बनाने का यह दोतरफा दृष्टिकोण, वास्तव में उन अधिकारों और गरिमा की प्राप्ति का प्रतीक है, जिनके लिए भगवान बिरसा मुंडा ने इतनी बहादुरी से लड़ाई लड़ी थी।
खूंटी के बाद, सी. पी. राधाकृष्ण रांची लौटेंगे और यहां आईआईएम रांची के 15वें दीक्षांत समारोह में बतौर मुख्य अतिथि शामिल होंगे। इस समारोह में कुल 558 छात्रों को डिग्री दी जाएगी। जबकि सात मेधावी विद्यार्थियों को मेडल और उपाधि देकर सम्मानित किया जाएगा।
































