रांची: आज 14 जुलाई 2025 को केंद्रीय सेवा समिति और विभिन्न आदिवासी संगठनों राजधानी रांची में पेसा कानून अधिनियम 1996 को अभिलंब लागू करने की मांग को लेकर एक बेहद प्रभावशाली मार्च प्रदर्शन निकाला। यह पद यात्रा के रूप में निकल गया जो 11 जुलाई को गुमला जिले के लिटा टोली स्थित पंकज बाबा कार्तिक उरांव के जन्म स्थल से शुरू हुई और 13 जुलाई को रांची के आईटीआई बाजरा तक पहुंची। उसी के बाद, 14 जुलाई को केंद्रीय सरना समिति के अध्यक्ष बबलू मुंडा के नेतृत्व में सैकड़ो कार्यकर्ताओं ने राज भवन तक पैदल मार्च किया और महामहिम राज्यपाल से पेसा कानून को लागू करने के संबंध में मांग रखा।
पेसा कानून लागू न करवाने पर सरकार पर लगाए गए आरोप
इस पूरे मार्च प्रदर्शन को संबोधित करते हुए बबलू मुंडा ने कहा कि हेमंत सोरेन सरकार आदिवासियों की पारंपरिक व्यवस्थाओं को नष्ट करने पर लग गए हैं और उन्होंने आरोप लगाते हुए साथी यह भी कहा कि विशेष समुदाय को लाभ पहुंचाने के लिए सरकार आदिवासियों की संस्कृति धर्म रीति रिवाज को खत्म करना चाहती है।
बबलू मुंडा ने स्पष्ट रूप से कहा कि पेशाब कानून अधिनियम 1996 को अनुसूचित क्षेत्रों में आदिवासियों को स्वशासन, जल जंगल जमीन पर अधिकार और पारंपरिक व्यवस्थाओं की सुरक्षा देना है, लेकिन झारखंड में यह सब कुछ भी नहीं हो रहा है जो एक दुर्भाग्यपूर्ण बात है।

ग्राम सभाओं का अधिकार
पहन के मुख्य जगलाल पहन पेसा अधिनियम की 23 विशेष शक्तियों का उल्लेख करते हुए बताया कि ग्राम सभा को जल जंगल जमीन पर अधिकार, विकास योजनाओं की निगरानी, स्थानीय विवादों का समाधान, पारंपरिक संस्कृति की रक्षा और पंचायत में आरक्षण है। उन्होंने यह भी कहा कि कानून आदिवासियों को उनकी पहचान और अधिकारों के साथ विकास का मार्ग भी देता है।
कार्यक्रम का संचालन महासचिव केंद्रीय सरना समिति महादेव तोपो ने किया और साथ ही प्रदर्शन के दौरान राज्यपाल से मांग की कि आदिवासी समाज के हक में फैसला लेते हुए पेसा कानून को झारखंड में जल्द से जल्द लागू करवाया जाए।





























