झारखंड: झारखंड हाईकोर्ट ने बिहार स्टेट फाइनेंशियल कॉरपोरेशन (BSFC) की ओर से दायर अपील (LPA) को खारिज कर दिया है। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस एमएस सोनक एवं न्यायमूर्ति राजेश शंकर की पीठ ने आदेश दिया है कि अदालत के पूर्व दिए गए रिव्यू आदेश को चुनौती देने वाली यह अपील कानूनी रूप से अमान्य (not maintainable) मानी गई है।
BSFC कर्मचारियों की ओर से दायर रिट याचिका में हाईकोर्ट की एकल पीठ ने यह निर्देश दिया था कि BSFC स्वयं अपने संसाधनों से अपने कर्मचारियों को 6वीं पे-रिवीजन कमीशन (6th PRC) का लाभ देने का स्वतंत्र निर्णय ले सकता है, बशर्ते वह वित्तीय रूप से योग्य हो।
BSFC के बोर्ड ने 28 जून 2019 में इससे संबंधित प्रस्ताव पारित किया था। लेकिन, 15 मई 2023 को यह निर्णय वापस ले लिया गया। कॉरपोरेशन की ओर से बताया कि उसकी वित्तीय स्थिति खराब है।
हाईकोर्ट की एकल पीठ के आदेश के खिलाफ BSFC ने रिव्यू याचिका दायर की, जिसे हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया था। इसके बाद, BSFC ने इस अपील के जरिए हाईकोर्ट के रिव्यू-निर्णय को चुनौती दी थी।
हाईकोर्ट की खंडपीठ ने BSFC की इस अपील को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि भारतीय न्यायप्रणाली में रिव्यू आदेश के खिलाफ अपील दायर करना अनुचित माना जाता है क्योंकि रिव्यू खारिज करने का आदेश कोई नया निर्णय नहीं होता है। मूल आदेश वही रहता है, उसके विरुद्ध सीधे अपील दायर की जा सकती है, लेकिन रिव्यू-निर्णय के ऊपर नहीं।

































