झारखंड: ‘एकम डायलॉग्स संवाद से निर्माण’ के दूसरे दिन कहा गया कि अब केवल चर्चा से काम नहीं चलेगा, बातों को जमीन पर उतारना होगा। कार्यक्रम में जुटे विशेषज्ञों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कहा कि अगर सच में सतत विकास और जलवायु संकट से निपटना है, तो, सभी को मिलकर काम करना होगा।
मुख्य अतिथि रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने कहा कि क्षेत्रीय विकास के बिना देश का विकास अधूरा है। विकसित भारत-2047′ का सपना तभी पूरा होगा, जब राज्यों और क्षेत्रों में मिलकर काम होगा। उन्होंने इस पहल को जमीनी नेतृत्व और संसाधनों के बेहतर उपयोग की दिशा में अहम बताया।
सीड के सीईओ रमापति कुमार ने कहा कि यह मंच सिर्फ चर्चा के लिए नहीं है। यहां जो बातें निकल रही हैं, उन्हें लागू करने पर फोकस है। उनका कहना था कि पूर्वी और मध्य भारत के लिए जलवायु अनुकूल और समावेशी विकास का ठोस रोडमैप तैयार किया जा रहा है।
कार्यक्रम में देशभर से आए करीब 70 विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया। चर्चा में बार-बार यही बात सामने आई कि गांवों और स्थानीय स्तर पर हो रहे छोटे-छोटे प्रयास ही बड़े बदलाव की नींव हैं। गवर्नेस सुधार, ग्रीन फाइनेंस, ऊर्जा बदलाव और संस्कृति आधारित आजीविका जैसे मुद्दों पर खुलकर बात हुई।
दूसरे दिन के सत्रों में यह सामने आया कि जब तक स्थानीय समुदाय आगे नहीं आएंगे, तब तक कोई भी योजना पूरी तरह सफल नहीं होगी। अंतिम सत्र में सभी ने मिलकर संकल्प लिया कि अब संवाद को कार्रवाई में बदलना है।





























