सरकारी जमीन कब्जा पर हाईकोर्ट सख्त

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झारखंड: हाईकोर्ट ने कोडरमा के चंदवाड़ा क्षेत्र में लगभग 87.41 एकड़ सरकारी जमीन पर भू-माफिया द्वारा कब्जे के आरोपों वाली जनहित याचिका पर गंभीरता दिखाई है। मामले में चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने चंदवाड़ा के सर्कल ऑफिसर अशोक कुमार भारती के शपथ पत्र पर नाराजगी जताई।

कोर्ट ने पाया कि सरकार के शपथ पत्र में कई बातें स्पष्ट नहीं हैं। कब्जे वाली सरकारी भूमि का कितना क्षेत्र वास्तव में खाली है, इसका विवरण नहीं दिया गया, “विवादित हिस्सा” कितना है, यह भी स्पष्ट नहीं किया गया. कोई मैप, प्लान या फोटो रिकॉर्ड में नहीं दिया गया। साथ ही, अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की स्थिति भी स्पष्ट नहीं है।

क्या कहा सरकार ने?

शपथ पत्र में सरकार की ओर से कहा गया था कि अधिकांश जमीन खाली और सरकारी कब्जे में है। जबकि, मामूली हिस्सा विवादित है, जहां से हटाने की कार्रवाई चल रही है। लेकिन, कोर्ट ने इसे अस्पष्ट बताते हुए सरकार से विस्तृत जानकारी मांगी है। कोर्ट ने राज्य सरकार को 2 अप्रैल 2026 तक नया शपथ पत्र दाखिल करने का आदेश दिया है। जिसमें, खाली जमीन का क्षेत्रफल, विवादित हिस्से का विवरण, नक्शा, फोटो और माप शामिल हों।

खंडपीठ ने याचिकाकर्ता को भी सबूतों के साथ अपना शपथ पत्र दाखिल करने की छूट दी है। अगली सुनवाई, 9 अप्रैल 2026 को होगी। दरअसल, याचिकाकर्ता अरविंद कुमार सिंह ने आरोप लगाया कि जिला प्रशासन से शिकायतों के बावजूद सरकारी भूमि से कब्जा हटाने की कोई कार्रवाई नहीं हो रही।

 

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