केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने स्कूलों में पढ़ाई की गुणवत्ता और विद्यार्थियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए कक्षाओं के सेक्शन की अधिकतम संख्या और बुनियादी ढांचे (इन्फ्रास्ट्रक्चर) को लेकर एक महत्वपूर्ण अधिसूचना जारी की है। यह नई व्यवस्था उन स्कूलों के लिए है जो बोर्ड से संबद्ध हैं या संबद्धता के लिए आवेदन करने की योजना बना रहे हैं।

अब स्कूलों में सेक्शन की संख्या भवन के कार्पेट एरिया पर निर्भर
CBSE की नई अधिसूचना के अनुसार, अब स्कूल अपने भवन के ‘कार्पेट एरिया’ के आधार पर यह तय करेंगे कि वे कितने सेक्शन (कक्षा विभाजन) चला सकते हैं। प्रत्येक सेक्शन के लिए कम से कम 400 वर्गमीटर (sq. m) कार्पेट एरिया होना अनिवार्य किया गया है। इस नियम का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि छात्रों के लिए पर्याप्त स्थान, संसाधन और शिक्षण वातावरण उपलब्ध हो।
क्यों लाया गया यह नया नियम?
CBSE का कहना है कि कई स्कूलों में दाखिले के दौरान अत्यधिक भीड़ हो जाती है, जिससे छात्रों की पढ़ाई और सुविधाएं प्रभावित होती हैं। इसको ध्यान में रखते हुए बोर्ड ने यह फैसला लिया है ताकि:
- हर सेक्शन में छात्रों की संख्या संतुलित रहे
- स्कूल का भौतिक ढांचा भीड़भाड़ रहित हो
- पढ़ाई की गुणवत्ता प्रभावित न हो
- बच्चों को पर्याप्त शैक्षणिक और भौतिक संसाधन मिलें
नियम के प्रमुख बिंदु:
- स्कूलों को अब प्रत्येक कक्षा सेक्शन के लिए 400 वर्गमीटर का न्यूनतम क्षेत्र देना होगा।
- यह व्यवस्था नई संबद्धता लेने वाले स्कूलों पर तत्काल प्रभाव से लागू होगी।
- जो स्कूल पहले से संबद्ध हैं, उन्हें भी इस दिशा में सुधार के लिए समय सीमा दी जाएगी।
- बोर्ड परीक्षा केंद्रों के चयन में भी इस नियम को ध्यान में रखा जाएगा।
दाखिले की प्रक्रिया में बदलाव की संभावना
सीबीएसई के इस फैसले का असर स्कूलों की दाखिला नीति पर भी पड़ेगा। अब स्कूल मनमर्जी से सेक्शन नहीं बढ़ा पाएंगे, जिससे अत्यधिक दाखिले पर रोक लगेगी। इससे उन छात्रों को फायदा होगा जिन्हें पहले भीड़ के कारण दाखिला नहीं मिल पाता था या पढ़ाई में परेशानी होती थी।
क्या है कार्पेट एरिया?
यह वह एरिया होता है जहां छात्र-शिक्षक वास्तव में पढ़ाई करते हैं, यानी कि दीवारों को छोड़कर फर्श का कुल क्षेत्रफल। इसमें क्लासरूम, लाइब्रेरी, प्रयोगशालाएं, स्टाफ रूम आदि शामिल होते हैं, लेकिन दीवारों की मोटाई, सीढ़ियां या लॉबी शामिल नहीं होतीं।
CBSE की यह पहल शिक्षा व्यवस्था को और पारदर्शी और गुणवत्तापूर्ण बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। स्कूलों को अब केवल नामांकन नहीं बल्कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षण के लिए भी अपने संसाधनों को मजबूत करना होगा।































