रांची: झारखंड में शहरी नगर निकाय चुनाव कराने को लेकर तैयारियां जोर पकड़ने लगी हैं। यदि सब कुछ तय समयसीमा में रहा, तो इस साल नवंबर में राज्य में नगर निकाय चुनाव संपन्न कराए जा सकते हैं। मंगलवार, 15 जुलाई को इस संदर्भ में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें नगर विकास मंत्री सुदिव्य कुमार, ओबीसी आयोग के अध्यक्ष और सचिव समेत कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

बैठक में ओबीसी आयोग ने नगर निकायों में पिछड़ा वर्ग को आरक्षण सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक “ट्रिपल टेस्ट” प्रक्रिया की अद्यतन स्थिति से राज्य सरकार को अवगत कराया। आयोग ने आश्वस्त किया कि सितंबर के पहले सप्ताह तक यह रिपोर्ट तैयार कर ली जाएगी और सरकार को सौंप दी जाएगी। ट्रिपल टेस्ट की रिपोर्ट मिलते ही राज्य सरकार के पास ओबीसी आरक्षण के साथ नगर निकाय चुनाव कराने का रास्ता साफ हो जाएगा।
बैठक में यह भी बताया गया कि राज्य सरकार नगर निकाय चुनाव में आ रही अन्य सभी बाधाओं को भी दूर करने की दिशा में सक्रियता से काम कर रही है। इसी क्रम में निर्वाचन आयोग की ओर से नगर निकाय चुनावों के लिए एक निर्वाचन आयुक्त की नियुक्ति की प्रक्रिया भी तेज़ कर दी गई है। उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही नए निर्वाचन आयुक्त की घोषणा की जाएगी, जिससे चुनाव प्रक्रिया को औपचारिक रूप से गति मिलेगी।
गौरतलब है कि झारखंड में लंबे समय से नगर निकाय चुनाव नहीं हो सके हैं, जिसके कारण कई शहरों में स्थानीय प्रशासनिक व्यवस्था कार्यकारी तौर पर चल रही है। चुनाव में देरी का प्रमुख कारण ओबीसी आरक्षण के तहत सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित ट्रिपल टेस्ट प्रक्रिया रही है, जिसमें पिछड़े वर्ग की भागीदारी को वैज्ञानिक तरीके से सुनिश्चित करना अनिवार्य है।
अब जबकि आयोग द्वारा रिपोर्ट सौंपने की समयसीमा स्पष्ट कर दी गई है और सरकार ने भी सभी आवश्यक कदम उठाने शुरू कर दिए हैं, तो यह उम्मीद की जा रही है कि नवंबर 2025 में राज्य भर के शहरी निकायों में लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत चुनाव सफलतापूर्वक संपन्न हो सकेंगे।
इस पूरे घटनाक्रम को राज्य के शहरी विकास और स्थानीय लोकतंत्र के पुनर्स्थापन की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।





























