US ट्रेड डील पर लोकसभा में राहुल गांधी का हमला

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भारत: लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी ने आज बजट सत्र में भाग लेते हुए अपनी बात रखी। इससे पहले, लोकसभा हंगामे के कारण बाधित होती रही थी। राहुल गांधी US ट्रेड डील, पूर्व आर्मी चीफ एमएम नरवणे की अप्रकाशित किताब पर अपनी बात रखना चाहते थे। लेकिन, उन्हें अनुमति नहीं मिलने पर हंगामा होता रहा। सदन चल नहीं पाया था।

बता दें कि, लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष अविश्वास प्रस्ताव ला चुका है। ओम बिरला ने सदन से दूरी बना ली है। आज लोकसभा शुरु होने पर विपक्ष ने बाधा नहीं डाली। अपनी बारी आने पर राहुल गांधी ने मोदी सरकार पर करारा हमला किया।

राहुल गांधी ने US ट्रेड डील को लेकर कहा कि सरकार ने हमारे कृषि क्षेत्र को अमेरिका के लिए खोल दिया है। अमेरिका हमारे फैसले ले रहा है। सरकार (मोदी) ने किसानों के लिए नहीं सोचा। भारत को बेचकर इन्हें शर्म नहीं आती।

राहुल गांधी ने कहा कि अमेरिका का टैरिफ तीन परसेंट से बढ़कर 18 परसेंट हो गया। कहा कि पीएम की आंखों में साफ डर दिखता है। इस क्रम में राहुल गांधी ने एपस्टीन फाइल्स का जिक्र किया। इस पर पीठासीन ने उन्हें टोका।

इसके बाद, राहुल गांधी ने गौतम अडानी का नाम लिया। कहा कि अडानी न तो साधारण बिजनेसमैन हैं और ना ही उनकी कंपनी साधारण कंपनी है। उनकी कंपनी पर अमेरिका में केस है। अमेरिका का टार्गेट पीएम (मोदी) हैं अडानी नहीं।

राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि यह कंपनी भाजपा का फाइनेंशियल स्ट्रक्चर है। राहुल गांधी के इस बयान पर रविशंकर प्रसाद ने आपत्ति करते हुए कहा। गलत बयानी करना इनकी आदत बन गया है। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने भी आपत्ति की।

राहुल गांधी रुके नहीं, अनिल अंबानी का नाम लेते हुए कहा कि उसे जेल में होना चाहिए हैं। उन्होंने फिर एपस्टीन फाइल और मंत्री हरदीप पुरी का नाम लिया। इस पर फिर रिजिजू और रविशंकर प्रसाद ने आपत्ति की।

राहुल गांधी ने तेल खरीद का मुद्दा भी उठाया और कहा कि क्या अब अमेरिका तय करेगा कि हम कहां से तेल खरीदें। अमेरिका अगर यह कह रहा है कि आप यहां (रूस) से तेल नहीं खरीद सकते, जिसकी मतलब है कि एनर्जी सेक्टर का हथियारीकरण हो रहा है। अमेरिका टैरिफ बढ़ाता है, इसका मतलब है कि फाइनेंस सेक्टर का वेपनाइजेशन हो रहा है। सरकार को शर्म आनी चाहिए।

राहुल गांधी ने कहा कि एआई से एक खतरनाक दुनिया दिख रही है। देश के 140 करोड़ लोगों के सामने नया चैलेंज है और कहा कि डॉलर का हथियार की तरह उपयोग किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि, अमेरिका को सुपर पावर बने रहना है, डॉलर का वर्चस्व बनाए रखना है, तो उसमें भारतीय डेटा की अहम भूमिका है। यह हमारी मजबूती है। डेटा महत्वपूर्ण है।

इस डील में क्या हुआ। प्रेसिडेंट ट्रंप के साथ अगर हम नेगोशिएट करते, तो पहली बात डेटा पर होती। हम कहते कि अगर आप डॉलर प्रोटेक्ट करना चाहते हैं, तो हमारे हित सबसे ऊपर हैं। हम इस तरह से डील नहीं करते कि हम आपके सर्वेट हैं।

 

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