Epstein Files से भारत की सियासत में मचा हंगामा

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भारत: अमेरिका के कुख्यात यौन अपराधी और लड़कियों का तस्कर जेफरी एपस्टीन के फाइल खुलने से दुनियाभर में तहलका मच गया है। हालांकि, जेफरी एपस्टीन का निधन हो चुका है। लेकिन, उसके ई-मेल में कई लोगों के नाम और तस्वीर आने से भूचाल मच गया। अमेरिकी सरकार अब उसके फाइल्स को दुनिया के सामने ला रही है।

एपस्टीन फाइल में कई नामी और दिग्गज लोगों के नाम सामने आए है। जिसमें उद्योपति अनिल अंबानी, मंत्री हरदीप सिंह पुरी के नाम है। इसके अलावा भी कई नामचीन लोगों के नाम है। जिससे राजनीति गरमा गई है। इसे लेकर विदेश मंत्रालय ने सफाई भी दी है और उसे बेतुका और आधारहीन माना है। लेकिन, विपक्ष है कि सरकार से मामला स्पष्ट करने की मांग पर अड़ी हुई है।

अमेरिका की एपस्टीन फाइल में केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी के नाम के बाद लगातार विपक्ष हंगामा कर रहा है। दावा है कि एपस्टीन को 2014 में हरदीप सिंह पुरी ने एक बड़ा फेवर दिया था। इस समय हरदीप सिंह पुरी (IFS) से रिटायर होकर बीजेपी में शामिल हो चुके थे। रिपोर्ट्स के मुताबिक, एपस्टीन ने अपनी असिस्टेंट को जल्द इंडियन वीजा दिलाने के लिए पुरी से सीधे मदद मांगी थी।

आरोप है कि पुरी ने तुरंत अपने संपर्कों और डिप्लोमैटिक चैनल का इस्तेमाल कर, इस काम को प्राथमिका देते हुए करवाया और जिससे तुरंत वीजा मिल गया। लेकिन, बात सिर्फ एक वीजा तक सीमित नहीं है। ई-मेल के खुलासे बताते हैं कि 2014 से 2017 के बीच दोनों के बीच कई बार बातचीत हुई। इसके अलावा, पुरी ने एपस्टीन के मैनहट्टन वाले आलीशान घर पर कम से कम तीन बार मुलाकात की। एक मैसेज में ये बता भी सामने आई कि जिसमें लिखा था, जब तुम अपने एक्सोटिक आइलैंड से वापस आओ, तब मिलते हैं।

मंत्री हरदीप सिंह पुरी के नाम आने के बाद से देश की सियासत गरम है। टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने स्क्रीनशॉट्स शेयर कर सीधे सवाल दागा है कि क्या यह देश की सुरक्षा के साथ समझौता नहीं था? वहीं, कांग्रेस और विपक्ष इस पूरे मामले की जांच की मांग कर रहा हैं। सवाल यह है कि क्या किसी राजनयिक को एक सजायाफ्ता की मदद करना सही था या नहीं।

 

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